शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि वे ‘पूरी तरह से किसानों के मुद्दों में व्यस्त’ हैं और उन्होंने कभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बारे में नहीं सोचा।
लेकिन जब जे.पी. नड्डा का कार्यकाल बार-बार बढ़ाया गया और पार्टी का शीर्ष पद सालों से खाली पड़ा है, तो क्या चौहान का यह दावा असली समर्पण है या एक चालाक तरीका है उभरते आंतरिक नेतृत्व संघर्ष से बचने का?
A) किसानों के प्रति वास्तविक समर्पण।
B) आंतरिक सत्ता संघर्ष से बचने की चालाकी।
C) दोनों — समर्पण के साथ राजनीतिक गणना।