A) चंदूमाजरा विद्रोही गुटों और बादल नेतृत्व के बीच पुल की भूमिका निभा सकते हैं।
B) एकता लौटने वाले गुटों को संगठन और नेतृत्व में हिस्सेदारी मिलने पर निर्भर करेगी।
C) पिछले विभाजनों से बने अविश्वास के कारण विलय में देरी या सीमित सहमति हो सकती है।
D) यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठे, तो “पंथक एकता” 2027 से पहले रणनीति से ज्यादा संदेश ही बनकर रह सकती है।