A) सिक्की ने बहस को व्यक्तियों से हटाकर सिख पंथ के भविष्य पर केंद्रित करने का प्रयास किया है।
B) उनका हस्तक्षेप राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक सामूहिक आत्ममंथन की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।
C) पंथ के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बाहरी ताकतें नहीं, बल्कि अपनी एकता, विश्वसनीयता और संस्थागत गरिमा को भीतर से सुरक्षित रखना भी है।
D) यदि ये सवाल यूँ ही दबते रहे, तो सबसे बड़ा नुकसान सिख पंथ का होगा, राजनीति का नहीं।