A) भाजपा की बढ़ी हुई सीटों की हिस्सेदारी उसे छोटे साझेदार के बजाय बराबरी का शक्ति केंद्र बना सकती है।
B) शिरोमणि अकाली दल अपना पारंपरिक जनाधार बनाए रख सकता है लेकिन कम सीटें मिलने से उसकी सौदेबाज़ी की ताकत घट सकती है।
C) असली परीक्षा इस बात की होगी कि प्रमुख सीटें किसे मिलती हैं और गठबंधन के चुनाव प्रचार व नेतृत्व से जुड़े फैसले कौन करता है।
D) सीटों की बड़ी हिस्सेदारी का कोई खास अर्थ नहीं होगा, जब तक भाजपा पंजाब में अपनी सीटों को जीत में नहीं बदल पाती।