A) बचे हुए नेता अब भी सुधार के एजेंडे में विश्वास रखते होंगे लेकिन इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए अब कौन बचा है ?
B) इतने सारे प्रमुख नेताओं के जाने के बाद, क्या पार्टी में बचे नेता भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं ?
C) जब पार्टी के प्रमुख चेहरे ही दूसरी राह चुन चुके हैं, तो पुनर सुरजीत के पास अपने नाम के अलावा अब कितनी राजनीतिक ताकत बची है ?
D) पुनर सुरजीत का पंथक एकता का वादा अब अपना अर्थ खो चुका है और बचे हुए नेता इतने प्रमुख नेताओं के जाने के बाद पार्टी की प्रासंगिकता साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।