आर.एस.एस. प्रमुख मोहन भागवत का दावा है कि संघ के कामों में महिलाओं की भागीदारी “स्वाभाविक रूप से” बढ़ रही है, जबकि मूल शाखा प्रणाली केवल पुरुषों के लिए ही है।
यह संघ के लिंग समावेशन के दृष्टिकोण के बारे में क्या बताता है?
A) वास्तविक सशक्तिकरण।
B) प्रतीकात्मक उपस्थिति।
C) परंपरा बरकरार।