A) पंथक नेतृत्व की पहचान चयनात्मक पालन नहीं, बल्कि सिद्धांतों में निरंतरता होनी चाहिए।
B) राजनीतिक सुविधा कभी भी संस्थागत सम्मान से ऊपर नहीं होनी चाहिए।
C) नैतिक नेतृत्व वही है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर कायम रहे।
D) जो पार्टी संस्थाओं की रक्षा का दावा करती है, उसकी प्रतिबद्धता भी बिना शर्त होनी चाहिए।