A) पार्टियों को जेन ज़ी की बात तब सुनने के बजाय पहले ही सुननी चाहिए, जब वह सड़कों पर उतर आए।
B) जेन ज़ी राजनीतिक पार्टियों को जाति, धर्म और पारंपरिक वोट-बैंक की राजनीति से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर रही है।
C) जो पार्टियां युवाओं के मुद्दों को समझेंगी, वे इस नाराज़गी को सार्थक राजनीतिक भागीदारी में बदल सकती हैं।
D) अगर पार्टियां खुद को नहीं बदलतीं, तो जेन ज़ी पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से बाहर अपना राजनीतिक प्रभाव बना सकती है।